पामेड़ के स्कूली बच्चों ने पोस्ट मैट्रिक छात्रावास की मांग को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपा आवेदनपूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कमलेश कारम नेतृत्व में छात्रों ने रखी अपनी समस्या

बीजापुर। जिले के उसूर विकासखंड के अति संवेदनशील एवं आदिवासी बहुल ग्राम पंचायत पामेड़ के स्कूली छात्र-छात्राओं ने अपनी शिक्षा से जुड़ी गंभीर समस्याओं को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर आवेदन सौंपा। इस दौरान पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कमलेश भी बच्चों के साथ मौजूद रहे और उन्होंने विद्यार्थियों की समस्याओं से जिला शिक्षा अधिकारी को अवगत कराया।
आवेदन में विद्यार्थियों ने बताया कि पामेड़ क्षेत्र में लगभग आठ गांव शामिल हैं। यहां प्राथमिक स्तर तक आश्रमों में शिक्षा की व्यवस्था है तथा कक्षा पहली से पांचवीं और छठी से आठवीं तक छात्र-छात्राएं छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर लेते हैं। लेकिन कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट मैट्रिक छात्रावास की सुविधा उपलब्ध नहीं होने से उन्हें पढ़ाई जारी रखने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
विद्यार्थियों ने बताया कि वर्तमान में लगभग 35 से 40 छात्र-छात्राएं प्रतिदिन करीब 15 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं। लंबी दूरी तय करने के कारण घर लौटते-लौटते देर रात हो जाती है, जिससे पढ़ाई भी प्रभावित होती है। कई अभिभावक इस कठिनाई के चलते अपने बच्चों की आगे की पढ़ाई छुड़ाने की बात कह रहे हैं।
छात्रों ने आवेदन में यह भी उल्लेख किया कि पूर्व में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को सुविधा अनुसार छात्रावास में रहने की व्यवस्था थी, लेकिन अब बजट नहीं मिलने का हवाला देकर छात्रावास खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके कारण विद्यार्थियों के सामने शिक्षा जारी रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष कमलेश ने कहा कि पामेड़ जैसे दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्र के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि छात्रावास की सुविधा नहीं मिलेगी तो अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थी बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को विवश हो जाएंगे। उन्होंने जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग से विद्यार्थियों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र समाधान करने की मांग की।
विद्यार्थियों ने जिला शिक्षा अधिकारी से मांग की है कि कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए वर्तमान छात्रावास में रहने, भोजन एवं अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था पुनः शुरू की जाए अथवा पामेड़ में पोस्ट मैट्रिक छात्रावास तत्काल संचालित किया जाए, ताकि क्षेत्र के बच्चे बिना किसी बाधा के अपनी शिक्षा पूरी कर सकें।
